पिछले दोनों बार यानी 2014 तथा 2019 की तरह प्रधानमंत्री मोदी ने इस बार भी गोधूलि बेला का चयन अपने शपथ ग्रहण के लिए किया जो की शुभ होता है। जब गाएं चरकर शाम को घर लौटती हैं तो उनके पैरों से धूल उड़ता है उसी समय को गोधूलि बेला कहते हैं जो कि मूहूर्त के लिए इस समय सूर्यास्त के समय पूजा और शुभ कार्यों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। 2019 की तरह फिर प्रधानमंत्री मोदी ने वृश्चिक लग्न को शपथ ग्रहण के लिए चुना है। वृश्चिक जो की एक स्थिर राशि है तथा सिरशोदय राशि भी है जो राज्याभिषेक के लिए अच्छा माना जाता है। जातक तत्वम के अनुसार वृश्चिक राशि छिपकर कार्य करने वाला तथा तीक्ष्ण राशि होता है।
वृश्चिक राशि का स्वभाव है कि वह निर्णय लेने में छुपा कर निर्णय लेता है तथा सबको हैरत में डालता है लेकिन जब 9 जून को 7 बज कर 23 मिनट पर शपथ लिया जा रहा था उसे समय चार ग्रह बृहस्पति, बुध, सूर्य तथा शुक्र लग्न भाव को सप्तम भाव से दृष्टि डाल रहे थे। सप्तम भाव विपक्ष को दर्शाता है इसलिए इस बार विपक्ष सरकार पर भारी रहने वाला है। इनके साथ शपथ ग्रहण के समय लग्नेश मंगल स्वराशी का होकर षष्टम भाव में स्थित है जो विवाद का घर है और यह मंगल_ शनि की तीसरी दृष्टि से पीड़ित है। शनि की दशम दृष्टि लग्न पर तथा मंगल की आठवीं दृष्टि लग्न पर दोनों की एक ही जगह लगन पर दृष्टि दर्शा रही है कि मोदी सरकार के मंत्रियों के द्वारा लिए गए त्वरित निर्णय सरकार को परेशानी में डाल सकते हैं।
इस बार के शपथ ग्रहण की कुंडली में सप्तम भाव में गुरु, शुक्र, बुध शुभ ग्रहों की उपस्थिति दर्शा रही है कि विपक्षी पार्टियां संसद में निर्णायक भागीदारी निभाएंगे और कितने ही नए सांसद अपने शानदार भाषणों के लिए जाने जाएंगे।
मेदिनी ज्योतिष में चंद्रमा जनता के राय का कारक माना जाता है चंद्रमा केम द्रुम योग में है तथा जिस पर लग्नेश तथा षष्टेश की दृष्टि पड़ रही है। चंद्रमा जो कि नवम भाव में है जो धर्म भाव माना जाता है जो दर्शा रहा है कि धार्मिक विवाद होगा क्योंकि षष्टेश जो विवाद तथा कोर्ट कचहरी का भाव है नवमांश कुंडली में चंद्रमा पर पाप ग्रह शनि की दृष्टि दर्शा रहा है कि भाजपा द्वारा लिए गए निर्णय आम जनता को पसंद नहीं आएगा।
जब बृहस्पति मिथुन राशि में गोचर करेगा मई 2025 से तो जनता का मूड भाजपा सरकार के खिलाफ हो जाएगा क्योंकि शपथ ग्रहण कुंडली से अष्टम भाव तथा नरेंद्र मोदी तथा भाजपा की कुंडली से भी अष्टम भाव में गोचर करेगा। शपथ ग्रहण के समय तृतीय भाव जो कनिष्ठ सहयोगी का भाव है उसका स्वामी शनि लग्न और लग्नेश दोनों को प्रभावित कर रहा है। अतः जदयू के द्वारा शुरुआत में ही रोड़ा खड़ा किया जाएगा। बाद में बड़ा सहयोगी टीडीपी जो की 11वें भाव को दर्शाता है वह बुध है जो सप्तम भाव में विपक्ष के भाव में जाकर बैठ गया है।
अत; तीसरी पारी जो मोदी सरकार की होगी वह बहुत बड़ा रुकावट तथा परेशानियों का होगा जो कि बड़े निर्णय जैसे यूनिफॉर्म सिविल कोड, एनआरसी, ओबीसी कोटे में मुस्लिम आरक्षण हटाना, अग्नि वीर योजना आदि को लाने में काफी कठिनाइयाँ आएंगी जो कि उसकी सहयोगी पार्टियों से भी परेशानी होगी। इसके साथ बिहार तथा आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य की मांग जो कि जेडीयू तथा टीडीपी के द्वारा मोदी के लिए नया सर दर्द होगा।
सप्तम भाव में तीन शुभ ग्रह बृहस्पति, बुध तथा शुक्र का होना यह दर्शा रहा है कि भारत इज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में सुधार करेगा और यहां के व्यवसाय में भी सुधार होगा।

अंतर दशानाथ बुध नवम भाव में केतु के साथ है तथा मंगल एवं शनि की दृष्टि में है। यह बुध अंतर्दशा में बहुत से स्कैंडल के कारण भाजपा को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। अभी चंद्रमा से चतुर्थ भाव में शनि का गोचर है जो की कंटक शनि है परंतु अंतर्दशानाथ मजबूत होने के कारण कोई विशेष प्रभाव नहीं डाल पाएगा लेकिन जब चंद्रमा में केतु अंतर्दशा जो 18 जुलाई 2025 से 14 फरवरी 2026 तक है इस समय सरकार को खतरा हो सकता है।

अष्टमेश बुध तथा दशमेश सूर्य का एकदम पास डिग्री में शामिल होना दर्शा रहा है की स्वास्थ्य या विवाद के कारण अचानक पद त्याग हो सकता है। विंशोत्तरी जैसा चंद्रमा महादशा तथा केतु अंतर्दशा जून 2025 से अक्टूबर 2025 तक है जो की बहुत खराब रहेगा।
उपरोक्त कुंडलियों के अध्ययन के आधार पर यह कहा जा सकता है कि मोदी सरकार फरवरी 2026 से अधिक समय तक सरवाइव नहीं कर पाएगी।